खम्हरिया आदिम जाति सेवा सहकारी समिति में धान खरीदी में भारी भ्रष्टाचार का आरोप
खम्हरिया आदिम जाति सेवा सहकारी समिति में धान खरीदी में भारी भ्रष्टाचार का आरोप
नौ सरपंच, तीन बीडीसी सहित सैकड़ों ग्रामीणों ने मुख्यमंत्री से की शिकायत

उदयपुर अंतर्गत ग्राम पंचायत खम्हरिया स्थित आदिम जाति सेवा सहकारी समिति में धान खरीदी के दौरान भारी भ्रष्टाचार और गंभीर अनियमितताओं का मामला सामने आया है। समिति के प्रबंधक पर किसानों से अवैध वसूली, धान खरीदी में गड़बड़ी, वजन में कटौती तथा मनमानी रवैये के गंभीर आरोप लगाए गए हैं। इस मामले को लेकर क्षेत्र के किसानों और ग्रामीणों में भारी आक्रोश व्याप्त है।
ग्रामीणों का आरोप है कि समिति में धान बेचने आए किसानों को अनावश्यक रूप से परेशान किया गया। कई किसानों का धान समय पर नहीं खरीदा गया, जबकि जिनका धान खरीदा गया, उसमें वजन में कटौती कर किसानों को आर्थिक नुकसान पहुंचाया गया। किसानों का कहना है कि धान खरीदी के बदले उनसे अलग-अलग बहानों से अवैध राशि की मांग की गई।
जांच में लीपापोती का आरोप
ग्रामीणों ने यह भी आरोप लगाया है कि जब इस मामले की शिकायत की गई और जांच की प्रक्रिया शुरू हुई, तब संबंधित अधिकारियों ने समिति प्रबंधक को बचाने का प्रयास किया। आरोप है कि जांच निष्पक्ष न होकर औपचारिकता बनकर रह गई, जिससे भ्रष्टाचार को संरक्षण मिला।
मुख्यमंत्री को सौंपी गई सामूहिक शिकायत
इस पूरे मामले को लेकर क्षेत्र की नौ ग्राम पंचायतों के सरपंच, तीन जनपद सदस्य (बीडीसी) सहित सैकड़ों ग्रामीणों और किसानों ने एकजुट होकर मुख्यमंत्री छत्तीसगढ़ शासन को लिखित शिकायत सौंपी है। शिकायत पत्र में समिति में हुई अनियमितताओं का विस्तार से उल्लेख करते हुए त्वरित और कठोर कार्रवाई की मांग की गई है।
ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि समय रहते कार्रवाई नहीं की गई, तो किसानों को भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ेगा और शासन की धान खरीदी व्यवस्था पर से लोगों का विश्वास उठ जाएगा।
प्रबंधक को हटाने और उच्च स्तरीय जांच की मांग
शिकायत में मांग की गई है कि
आदिम जाति सेवा सहकारी समिति खम्हरिया के प्रबंधक को तत्काल पद से हटा कर
धान खरीदी में हुई गड़बड़ियों की उच्च स्तरीय एवं निष्पक्ष जांच कराई जाए साथ ही दोषी अधिकारियों और कर्मचारियों के विरुद्ध कड़ी अनुशासनात्मक व कानूनी कार्रवाई किया जाए।
ग्रामीणों का कहना है कि आदिम जाति सेवा सहकारी समितियों का उद्देश्य आदिवासी और ग्रामीण किसानों को राहत देना है, लेकिन खम्हरिया समिति में इसके उलट किसानों का शोषण किया जा रहा है।
नाराजगी बढ़ी, कार्रवाई का इंतजार
शिकायत के बावजूद अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं होने से ग्रामीणों में शासन-प्रशासन के प्रति नाराजगी बढ़ती जा रही है। अब सबकी नजरें मुख्यमंत्री स्तर पर की गई शिकायत पर टिकी हैं कि प्रशासन इस गंभीर मामले में क्या कदम उठाता है और क्या पीड़ित किसानों को न्याय मिल पाता है या नहीं।
